सीधी | |
कृषि विज्ञान केन्द्र, सीधी के सस्य वैज्ञानिक डा. धनंजय सिंह द्वारा किसान भाईयो को जानकारी दी गई कि रबी का सीजन प्रारंभ हो गया है मुख्य फसल जैसे- गेहॅू, चना, अलसी, मसूर एवं सरसो की बुवाई का कार्य प्रारंभ हो गया है ऐसी दशा में किसान भाईयो से अनुरोध है कि बुवाई से पूर्व उन्नतशील प्रजातियो के बीज की व्यवस्था कर ले तथा बुवाई से पूर्व बीज का शोधन अवश्य करे बीज के शोधन हेतु कार्बेन्डाजिम का प्रयोग करे। बिना उपचारित किये हुये बीज की बुवाई करने से फसलो में रोग लगने की सम्भावना बनी रहती है। गेहॅू का बीज उपचार न होने की दशा में फाल्स स्मट, लूज स्मट एवं उकठा जैसे- रोग लग जाते हैं। चने एवं मसूर की फसल में बीज उपचार न होने की दशा में उकठा रोग जिसमें खेत में एक-एक पौधे सूखने लगते है अतः इन सब समस्याओ से बचने हेतु सभी फसलो की बुवाई से पूर्व अपने बीज का शोधन यानि उपचार अवश्य करे। किसी भी फसल के उत्पादन में उन्नतशील प्रजाति का बहुत ही महत्वपूर्ण योगदान होता है। केवल उन्नतशील प्रजाति के उन्नतशील बीज अपनाने मात्र से उत्पादन में 15-20 प्रतिशत की वृद्वि हो जाती है। गेहॅू की सिंचित दशा में जी.डब्ल्यू 273, जी.डब्ल्यू 366, जी.डब्ल्यू 322, जे.डब्ल्यू 3382 एवं पूसा तेजस जैसी किस्मे उपयुक्त होती है एवं गेहॅू की असिंचित दशा में जे.डब्ल्यू 3211, जे.डब्ल्यू 3288, एच.आई 1500 एवं जे.डब्ल्यू 17 उपयुक्त किस्में है। चना की फसल में समय से बुवाई हेतु जे.जी. 12, जे.जी. 11, जे.जी. 226 एवं जे.जी 130 किस्में उपयुक्त है। यदि चना की फसल की बुवाई देर से की जानी हो तो ऐसी दशा में जे.जी 14 किस्म का प्रयोग किया जाना चाहिये। अलसी की फसल में जे.एल.एस. 79 एवं जे.एल.एस 73 किस्म उपयुक्त होती है। सरसो की फसल में पूसा तारक, पूसा जगन्नाथ एवं पूसा अग्रणी जैसी किस्मे उपयुक्त होती है। कृषि विज्ञान केन्द्र, सीधी में गेहॅू की किस्म जे.डब्ल्यू 3382 एवं अलसी कि किस्म जे.एल.एस. 79 एवं जे.एल.एस. 73 किस्मो की प्रजनक बीज उपलब्ध है। |
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